उत्पादन संघर्ष के साथ वर्ग संघर्ष भी जरूरी है।
शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी जी की✍️ कलम से
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उत्पादन संघर्ष के साथ वर्ग संघर्ष भी जरूरी है।
साथियों,,
लाल जोहार
“दुनिया में दो प्रकार के प्रमुख संघर्ष हैं एक है वर्ग संघर्ष और दूसरा उत्पादन संघर्ष।” देश में किसान और मजदूर हर दिन उत्पादन संघर्ष में भिड़े रहते हैं। तभी तो अनाज पैदा होता है, कारखानों में माल बनता है, खदानों में खनिज निकलता है, मकान बनते हैं, रास्ता बनता है, रेल-मोटर चलती है। यह सब तो उत्पादन संघर्ष का फल है। परंतु आज की समाज व्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर पूँजीपतियों का कब्जा है, इसलिए जो भी पैदा होता है वह पूँजीपतियों के भंडार में जा पहुँचता है। इसलिए आज सिर्फ अन्न पैदा करने से ही नहीं चलेगा, उत्पादन संघर्ष के फलों पर अधिकार जमाने के लिए लुटेरे वर्ग के खिलाफ संघर्ष भी करना पड़ेगा।
“लुटेरे वर्ग के खिलाफ संघर्ष को ही वर्ग संघर्ष कहेंगे। (राजहरा का) मजदूर उत्पादन संघर्ष के साथ-साथ वर्ग संघर्ष में भी हिस्सा लें रहा है। खदानों में पत्थर के साथ संघर्षरत है और मैदान में पूँजीपति एवं लुटेरों के खिलाफ संघर्ष में बहादुरी के साथ आगे बढ़ रहा है।”
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लाल जोहार
राम चरण नेताम
छत्तीसगढ़ माईंस श्रमिक संघ
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा
दल्ली राजहरा