बहता पानी
बहता पानी गीत सुनाए,
जीवन का संदेश सिखाए।
कभी नन्हीं धारा सा बहता,
कभी सागर बन सबको कहता।
पत्थरों से टकरा कर भी,
रुकता नहीं, चलता है जी।
धरती को देता हरियाली,
लाता है जीवन में खुशहाली।
कभी नदियों सा मचल-मचलाए,
कभी झीलों में शांति फैलाए।
सफ़र निरंतर इसका प्रमाण,
सिखाता साहस हर इंसान।
बहता पानी कहता यही,
रुको नहीं, चलते रहो सही।
कवि
विनेश