बचपन
मुक्तक
~~~~~~~~~~~
न कोई छल कपट कोई बहुत मासूम है बचपन।
सभी के मन सुहाता खूब खुशियों से भरा आंगन।
लिए सब कुछ बहुत जल्दी मगर यह बीत जाता है।
जिसे फिर क्यों नहीं है जिन्दगी भर भूल पाता मन। ~~~~~~~~~~~~
-सुरेन्द्रपाल वैद्य
मुक्तक
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न कोई छल कपट कोई बहुत मासूम है बचपन।
सभी के मन सुहाता खूब खुशियों से भरा आंगन।
लिए सब कुछ बहुत जल्दी मगर यह बीत जाता है।
जिसे फिर क्यों नहीं है जिन्दगी भर भूल पाता मन। ~~~~~~~~~~~~
-सुरेन्द्रपाल वैद्य