मुक्तक
मुक्तक
उम्र भर दौड़ते भागते हम रहे
रात सोती रही जागते हम रहे
जो लिखा था मुकद्दर में वो ही मिला
मन्नतें कितनी भी माँगते हम रहे
डॉ अर्चना गुप्ता
मुक्तक
उम्र भर दौड़ते भागते हम रहे
रात सोती रही जागते हम रहे
जो लिखा था मुकद्दर में वो ही मिला
मन्नतें कितनी भी माँगते हम रहे
डॉ अर्चना गुप्ता