रास्ता कहता है...!
. पूर्णिका ००१५
प्रारम्भी नेह:-
हर रास्ता कहता तेरा, चलना आसान है।
है गिर के उठना और, सम्भलना आसान है।।
हो ऊँची नीची पगडंडी, या पथरीली राहें।
हर राह हौसले से तय, करना आसान है।।नेह:-१।।
आसान मार्ग सफलता के, पथ चुरायेंगे।
ज़िम्मेदारी से सच रास्ते, बुनना आसान है।।नेह:-२।।
दूर रहे मंज़िल या हो, दुर्गम भरे सफर।
अवरोधों के पत्थर पड़े, चुनना आसान है।।नेह:-३।।
घबरा के मुश्किलों से, जब भी हारता है मन।
करके बहाना थकने का, रुकना आसान है।।नेह:-४।।
परिचयी नेह:-
जब बात चुभ रहे हो तुम्हे, शब्द कांटे बन।
तो कुछ बोलने से ‘चिद्रूप’ सुनना आसान है।।
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©️®️ पूर्णिका-कार :- पाण्डेय चिदानन्द “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित १३/०९/२०२५)
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