क्या कीजे......
जब मौसम हसीन हो
मोहब्बत रूठी हो
तो क्या कीजे……………
कभी बादलों संग,
कभी सूरज संग
कभी हवाओ के संग,
कभी खुद से बाते किया करो
मोहब्बत रूठें तो रूठें,
तुम ना खुद से रूठा करो
कभी धुप धुप कभी छाव छाव,
खुद के संग भी चला करो
दीपिका सराठे