प्रेम विरह की तड़पन
मे चंद्र ग्रहण मे विरह सी
प्रेमिका बन गई हूँ तड़पन कि
दुग्ध चंद्र अब सुर्ख लालिमा
बन बैठा वो अश्रु बही अखियन सा
चंद्र ग्रहण ताकत ताकत
हुई मेरी तो भौर
प्रेमिका भी छली बन गई
विरह कि तड़पन मे
तांक तांक झांकत खिड़की
नग्न अखियन अब देख सकि
प्रेम विरह कि तड़पन ने
ग्रहण पीड़ा कम लगी अंधीयारी मे
इश्क़ का रंग भी सुर्ख लालिमा
लिपट लिपट कर रोया विरह मे
अँधियारा ना सहा गया पीड़ा मे
विरह का रंग भी दुग्ध चंद्र मे
दीपिका सराठे