Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
13 Sep 2025 · 1 min read

अंदाज़े - शायरी

जब भी कहीं इश्क़ वालों की , महफ़िल सजती है
न चाहते हुए भी तेरा जिक्र , जुबां पर हो आता है ।

रोशन हो जाती है महफ़िल , जब तुझको बयाँ करता हूँ
इश्क के परवानों का , इश्क पर यकीन बढ़ जाता है ।

अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

Loading...