प्रभु का साथ (लावणी छ्न्द )
पाना प्रभु का साथ अगर है,
रखिये मन को शुद्ध सभी।
चालाकी का जोर कभी भी,
चलता प्रभु पर नहीं कभी।
चाहें कुछ हैं उसे खरीदें,
वैभव को दिखला अपने।
सबकुछ उनका दिया हुआ है,
क्यों देखो झूठे सपने।
प्रभु केवल हैं प्रेम चाहते,
सच्चाई दिल की चाहें।
सत्पथ के अनुयायी जन की,
खुल जाती सारी राहें।।
डॉ. सरला सिंह ‘स्निग्धा’
दिल्ली