तेरे आमाल ही तेरे मज़हब की पहचान हो बस ,
तेरे आमाल ही तेरे मज़हब की पहचान हो बस ,
अपने किरदार को अख़लाक की वो दौलत बख्शों ।
डाॅ फ़ौज़िया नसीम शाद
तेरे आमाल ही तेरे मज़हब की पहचान हो बस ,
अपने किरदार को अख़लाक की वो दौलत बख्शों ।
डाॅ फ़ौज़िया नसीम शाद