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13 Sep 2025 · 3 min read

हिन्दी दिवस और प्यारे मोहन

व्यंग्य
हिन्दी दिवस और प्यारे मोहन

चुपके चुपके फिल्म तो आपने देखी होगी। हिन्दी लाल यानी प्यारे मोहन की। दो ही कथा मशहूर हैं। एक लीलावती ( सत्यनारायण कथा फेम) और दूसरी प्यारे मोहन। प्यारे मोहन की कथा बड़े कलाकारों की वजह से हिट हो गई। लीलावती घर में रह गई।
अपनी हिन्दी भी कुछ कुछ ऐसी है। चुपके चुपके अंग्रेजी ने पैर पसार लिए। मल्टी कास्ट फिल्म थी। हिट हो गई। हिन्दी लीलावती की कथा बनकर रह गई। यूं हिन्दी भी मल्टी कास्ट है लेकिन इससे पेट और तिजोरी भरने वालों को संतोष नहीं मिलता। इसलिए कलाकार ( हर दृष्टि से) अंग्रेजी बोलते हैं।
पहले फिल्मों में लंबे संवाद ( सॉरी, डायलॉग) होते थे। रोमन में याद किए जाते थे। आज भी रोमन अंग्रेजों की कमी नहीं है। अपनी हिन्दी में सभी मसाला है। गालियां देनी हो तो भरपूर। प्यार करना हो तो भरपूर। चमचागीरी करनी हो तो भरपूर। नफरत के लिए तो अनगिनत शब्द हैं। किसी की उतारनी हो तो एक शब्द से उतर जाए…निर्लज्ज..निखट्टू।

मीठी चाशनी है अपनी हिन्दी। कोई जैसे ही बोले…
“हेलो…क्या मैं श्रीमन…से ही संवाद कर रहा हूं। ”
जी।
“मेरा नाम बांके बिहारी लाल मिश्रा है। हमारे परम पूजनीय माता जी और पिता जी बिहारी जी के भक्त थे। उन्होंने ही यह नाम रख दिया। हम तो कुछ और नाम सोचकर दुनिया में आए थे। ”
जी बताइए। क्या सेवा कर सकता हूं?
“सेवा तो आप क्या हम करेंगे। आपका नाम तो स्वर्णिम आकाश पर सूर्य की रश्मि की मानिंद स्वर्ण अक्षरों में लिखा है। हमारी एक पुस्तक क्लिष्ट हिन्दी की आई है। आपको प्रेषित करने का अभिलाषी हूं। ”
क्लिष्ट हिन्दी…?
जी
“आप क्लिष्ट हिन्दी के शब्द निकालकर कहीं भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके दो लाभ होंगे। आप विद्वान कहे जाएंगे। नंबर दो..सामने वाला समझेगा नहीं। जब समझेगा नहीं तो उत्तर कहां से देगा। अर्थात् निरुत्तर। ”

उदाहरण देखिए
गूगल बाबा के शब्दकोश में सबसे बड़ा हिन्दी का शब्द है .
लौहपथगामिनिसूचकदर्शकहरितताम्रलौहपट्। यह 24 अक्षरों और 10 मात्राओं से मिलकर बना है और इसका अर्थ “रेल की पटरियों के किनारों पर लगे हरे रंग के लोहे के लिखित निर्देश बोर्ड।”
दूसरे भी शब्द हैं-किंकर्तव्यविमूढ़। गवेषणोन्मुखात्मक, और अन्यमनस्क। सामने वाला सुनते ही ढेर।

यह भी सुनिए
एक हिन्दी के मास्टर जी रेलवे स्टेशन गए। तब आरक्षण नहीं होता था। टिकट खिड़की पर पहुंचते ही बोले…”हे लौहपथगामिनीयात्राप्रमाण पत्र वितरक महोदय! ”
विंडो क्लर्क बोला…”इंक्वायरी से पूछो… नेक्स्ट।”

पीछे खड़े आदमी ने कहा..”अरे! जल्दी बोलो.. कहां जाना है,?” तब मास्टर जी को टिकट मिला।
हमारे एक साथी ने किंकर्तव्यविमूढ़ लिख दिया। कुछ लिखावट। कुछ शब्द। लाइन लग गई..पहले इसे पढ़ो। फिर खबर समझेंगे।

अर्थ बस इतना है हिन्दी मातृ भाषा है। मात्र भाषा नहीं। यूनिकोड का हिन्दी रूपांतरण करोगे तो फंस जाओगे। हिन्दी को आगे बढ़ाओ। तुम्हारे हिन्दी में कितने अंक ( 35 से 58%,) आए। यह प्रश्न नहीं है। सवाल यह है कि तुम्हारे बच्चे को हिन्दी में 99% कैसे मिल गए?

हिन्दी दिवस पर हर साल रोने वालों! देखो हमारी हिन्दी को प्यारे मोहन ने कहां से कहां पहुंचा दिया? गुड मॉर्निंग कम हो गई। सुप्रभात बढ़ गया। वो जमाने गए जब हिन्दी दिवस का श्राद्ध होता था। अब बेंत वाले, बिना बात मारने वाले, झुंझलाने वाले मास्टरों से हिन्दी बाहर निकल गई है। अब यूट्यूब पर लोग वर्णमाला सीख रहे हैं।

चलो। रखता हूं। हिन्दी दिवस है। आपका कई जगह जाना होगा। इस साल भी आपका सम्मान होगा।

सूर्यकांत
13.09.2025
(१३.०९.२०२५)

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