ओमकार
मैं माधव की मुरली का मधुर राग हूँ।
राधिका श्याम का शाश्वत अनुराग हूँ।
माँ पार्वती की हूँ मैं कठिन साधना,
नीललोहित महादेव का बैराग हूँ।।
रामायण श्लोकों का मूल अनुवाद हूँ।
गीता में कृष्ण अर्जुन का संवाद हूँ।
मोह-माया सांसारिक सुख- दुख से परे,
समस्त धरती में विचरता आजाद हूँ।।
मैं सत्य सनातन सतचित निराकार हूँ।
समस्त सृष्टि का मैं ही तो आधार हूँ।
मेरे ही द्वारा सकल सृष्टि है पोषित,
समस्त सृष्टि का मैं ही पालनहार हूँ।।
समय-समय पर लेता विविध अवतार हूँ।
मैं ही मोक्ष हर मानव का उद्धार हूँ।
मैं जग नियंता पंच भूतों का स्वामी,
अखिल ब्रह्माण्डीय ऊर्जा ओमकार हूँ।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)