हिंदी हमारी पहचान
हिंदी : हमारी पहचान
हिंदी हमारी संस्कृति की शान है,
भारत की आत्मा, इसका अभिमान है।
संप्रेषण की यह मीठी बोली,
हर दिल में बसती इसकी टोली।
बच्चों की तोतली जुबान में,
मां के मधुर दुलार में,
पिता की सीख और डांट में,
भाई-बहनों के अनुपम प्यार में।
वंदन, अभिनंदन, प्रार्थना-पूजा,
हर रस में रची-बसी यह दूजा।
शब्दों की जब धार बह जाती है,
तो मस्तिष्क में गूंज उठ जाती है।
हिंदी बिन जैसे तन बिन प्राण,
हिंदी से मिलता जीवन का मान।
राजभाषा बन गौरव बढ़ाती,
सारे विश्व में पहचान दिलाती।
आओ मिलकर प्रण करें यही,
हिंदी से जग में रोशन हो जगी।
यह केवल भाषा नहीं, संस्कृति है हमारी,
भारत की धड़कन, हिंदी प्यारी।
मुकेश शर्मा विदिशा