उतार फैकी तुमने वो शर्म -ओ- हया
उतार फैकी तुमने वो शर्म -ओ- हया
जिन्हें पहनकर तुम कभी शान से चला करते थे
तुम भारत को क्या समृद्ध बनाओगे
झूठ की धारा पर तुम खुद चलते हो
सत्य की राह क्या दिखलाओगे।
हरमिंदर कौर, अमरोहा
उतार फैकी तुमने वो शर्म -ओ- हया
जिन्हें पहनकर तुम कभी शान से चला करते थे
तुम भारत को क्या समृद्ध बनाओगे
झूठ की धारा पर तुम खुद चलते हो
सत्य की राह क्या दिखलाओगे।
हरमिंदर कौर, अमरोहा