छू लो
छू लो तुम मुझे,
जैसे हवा की लहरें छू लेती हैं पत्तों को,
बिना किसी शोर के, बिना किसी बंधन के।
छू लो तुम मुझे,
जैसे धूप छू लेती है धरती को,
भर देती है जीवन,
हरियाली और मुस्कान।
छू लो तुम मुझे,
जैसे चाँदनी छू लेती है रात को,
भर देती है शांति,
शीतलता और सुकून।
छू लो तुम मुझे,
जैसे एक सपना छू लेता है दिल को,
और जगा देता है,
नई आशा, नए अरमान।
तुम मुझे छू लो,
और मैं पूरी हो जाऊँगी,
एक अधूरी कहानी,
एक पूरी कविता बन जाएगी।