मन में जितने रंग है, उनको दें पहचान।
मन में जितने रंग है, उनको दें पहचान।
तूलिका रखिए सोच का, बने नहीं नादान।।
जीवन के हर रंग में, रहे बना मुस्कान।
हरपल सुखमय हो सदा, भरिए सहज उड़ान।।
शांति अमन चैन से, पथ का राही मान।
चलते रहना काम है, निज ऊर्जा पहचान।।
संशय खुद पर क्यों भला, यह देता व्यवधान।
आत्म-विश्वास को रखें, जिससे पर आसान।।
प्रकृति मूल को जानता, देकर सबको मान।
“पाठक” का विश्वास यह, खुश होते भगवान।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)