कुण्डलिया छंद
!! श्रीं !!
पिता हमारे राम हैं, हम उनकी संतान।
सबके घट में वे बसे, वे ही तत्व प्रधान ।।
वे ही तत्व प्रधान, सभी में राम समाये।
हर पल सबके साथ, उन्हें हम जान न पाये।।
प्राण रूप श्री राम, मोक्ष के खोलें द्वारे।
शत-शत करूँ प्रणाम, राम प्रभु पिता हमारे ।।
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महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा।
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