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12 Sep 2025 · 1 min read

#मुक्तक

#मुक्तक
बदलाव को क्या रोना…?
(प्रणय प्रभात)
“बदलावों पर क्यूं कर रोना बदलाव वक़्त की सीरत है,
कुछ वक़्त बदलता रहता है, हालात बदलते रहते हैं।
क्या फ़िक़्र करें क्या गिला करें हर दौर में होता आया है,
कुछ मौसम जैसे लोगों के जज़्बात बदलते रहते हैं।।”
😊😊😊😊😊😊😊😊😊
संपादक
न्यूज़&व्यूज
(मध्यप्रदेश)

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