जख़्म तुमने दे दिये बैठे रहे हम।
जख़्म तुमने दे दिये बैठे रहे हम।
दर्द सीने में लिये बैठे रहे हम।
प्रेम का अमृत हमें तो मिल न पाया,
तो गरल को ही पिये बैठे रहे हम।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’
जख़्म तुमने दे दिये बैठे रहे हम।
दर्द सीने में लिये बैठे रहे हम।
प्रेम का अमृत हमें तो मिल न पाया,
तो गरल को ही पिये बैठे रहे हम।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’