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12 Sep 2025 · 1 min read

जख़्म तुमने दे दिये बैठे रहे हम।

जख़्म तुमने दे दिये बैठे रहे हम।
दर्द सीने में लिये बैठे रहे हम।
प्रेम का अमृत हमें तो मिल न पाया,
तो गरल को ही पिये बैठे रहे हम।

राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’

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