रुकने ना पाए जिंदगी
रुकने ना पाए जिंदगी, हंसकर बिताओ हर घड़ी।
ठीक इससे पहले की, रुक जाए ना सांसों की लड़ी।।
पेचीदा है यह जिंदगी उस पर तमाम तरह की बंदिशें।
खोखला कर ना दे,पहरा लगाती औरों की साजिशें की कड़ी।।
देख लो सतर्क हो और हर किसी को पहचान लो।
भूल फिर कोई तुम्हें, कर ना दे अपमानित कहीं।।
करो ऐसा जतन,बस में हो जाए अंबर और यह जमी।
आंखों में चमके रंगों की हर खुशी,रुकने न पाए जिंदगी।।
हार से डरना नहीं,गिर भी जाओ तो हताश होना नहीं।
वक्त ने गिराया जिसे,संभल कर उठा और जीता है वही।।
जिंदगी भी शतरंज की तरह,खेलती कहानी कई नयी।
हर कोई तैयार खड़ा,लेकर चाल मात देने की बड़ी।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”