राइट हैण्ड
शैतान को साम्राज्य विस्तार की तीव्र लालसा हुई। उसने मंत्रिमण्डल की आपात बैठक बुलाई। बैठक में लोभ, मोह, काम, क्रोध, झूठ, फूट, अहंकार इत्यादि उपस्थित हुए। शैतान ने अपनी विश्व विजय की योजनाओं के बारे में लम्बा- चौड़ा खाका खींचा। उसने सम्पूर्ण विश्व का भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजन करते हुए लोगों की प्रवृत्ति के अनुसार दायित्व सौंपा।
शैतान ने कहा – ‘केवल फूट मेरे साथ रह जाएगा।’
यह सुनकर सबको आश्चर्य हुआ। वे सोचने लगे कि काश ! हमें भी ईश्वर ने फूट से भी अधिक काले- कलूठे, वीभत्स और भयावह बनाया होता तो हमें भी अपने सम्राट शैतान सिंह का सदा सानिध्य प्राप्त हुआ होता। सम्राट शैतान सिंह के प्रस्ताव से क्रोध ज्यादा दुःखी हुआ, क्योंकि वह लगभग फूट के बराबर ही कुरूप था। बाकी सभी कुछ हद तक ठीक थे।
अब क्रोध से रहा न गया। उसने फूट को अपने साथ रखने का कारण जानना चाहा। तब सम्राट शैतान सिंह ने कहा- सभी मेरे प्रिय हो। मैं सबको अपने आसपास ही रखना चाहता हूँ। मगर साम्राज्य विस्तार आवश्यक है। यह सही है कि फूट मेरा राइट हैण्ड है, क्योंकि जहॉं आप परास्त होने लगते हो, मैं वहाँ फूट को भेजता हूँ, क्योंकि फूट में वो कला है, जो बहुत आसानी से कहीं भी डल जाता है… और फिर आप जंग जीत जाते हो।
मेरी 16वीं कृति : मृगतृष्णा (लघुकथा- संग्रह) से…।
डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति
साहित्य वाचस्पति
इंटरनेशनल स्टार अवार्ड प्राप्त
हरफनमौला साहित्य लेखक