हम जैसे हैं, अच्छे हैं
हम जैसे हैं, अच्छे हैं
लोग मेरा हमेशा गलत फायदा उठाते हैं, क्योंकि मुझे “ना” कहना नहीं आता। लोगों को देखता हूँ, वे कितनी आसानी से “ना” कह देते हैं।
मुझे खुशी मिलती है जब मैं किसी के काम आता हूँ, पर जब मेरी बारी आती है-लोग नज़रें चुराने लगते हैं।
जिन्हें जीवन भर अपना माना, वे ही सबसे ज़्यादा पराए निकले। पराए तो फिर भी हाल पूछ लेते हैं, ये तो बस नाम के अपने हैं।
कभी-कभी लगता है, मैं भी इनके जैसा बन जाऊँ। पर मेरा अच्छा स्वभाव हमेशा आड़े आ जाता है।
और फिर सोचता हूँ-जाने दो यार… हम जैसे हैं, अच्छे हैं।