क्या आपको भी ऐसा लगता है?
क्या आपको भी ऐसा लगता है?
दौड़
सोचा था कुछ अच्छा करेंगे लाइफ में नौकरी के बाद, पर नौकरी ने दिखा दिया ये एक अंतहीन चक्र है।
सुबह उठना, ऑफिस जाना, शाम को घर लौट आना-हर दिन जैसे वही दिन दोहराता।
क्या जिंदगी बस इतनी ही है? या और भी कुछ हो सकता था कहीं.. पर पैसे की भूख में उम्र और वक्त दोनों खपते जाते हैं।
बालों की हल्की सफ़ेदी चुपके से कहती है-ज़िंदगी बीत रही है, हम बस सांसें ले रहे हैं, जी नहीं रहे