#क़तआ (मुक्तक)
#क़तआ (मुक्तक)
शिनाख्त के नाम।
(प्रणय प्रभात)
“लहर से खेलना आदत हे दरिया जानता है ये,
जो चाहा वक़्त ने तो तुम भी ये सच जान जाओगे।
मुझे साहिल समझने की ज़रा भी भूल मत करना,
तलातुम हूं जो उतरे तो कभी बाहर न आओगे।।”
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#शब्दार्थ…
दरिया/सागर, साहिल/किनारा, तलातुम/चक्रवात