मुक्तक
मुक्तक
~~~~~~~~~~
जगाकर भावनाएं स्नेह की मत दूर जाना तुम।
मिटाकर दूरियां सारी हमेशा पास आना तुम।
करें निश्छल सुकोमल प्रीत का सम्मान जीवन में।
नयी राहें नयी मंजिल नये आयाम पाना तुम।
~~~~~~~~~~~~~
-सुरेन्द्रपाल वैद्य
मुक्तक
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जगाकर भावनाएं स्नेह की मत दूर जाना तुम।
मिटाकर दूरियां सारी हमेशा पास आना तुम।
करें निश्छल सुकोमल प्रीत का सम्मान जीवन में।
नयी राहें नयी मंजिल नये आयाम पाना तुम।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य