वो करते हैं बातें बड़ी-बड़ी
बोलचाल, मलमूत्र त्याग का, बोध नहीं जिनको कुछ भी।
वो करते हैं बातें बड़ी- बड़ी, जाग्रत समाज को करने की।।
बोलचाल मलमूत्र त्याग का——————-।।
कुछ कम नहीं विद्वान ये लोग, क्या इनका मुकाबला करोगे।
ये शब्दकोश है भाषा के, भाषा इनकी क्या बोलोगे।।
कोई शर्म नहीं, कोई भय नहीं, छोटे-बड़े का इनको कुछ भी।
वो गाते हैं राग पश्चिम के, नई क्रांति समाज में लाने को।।
बोलचाल मलमूत्र त्याग का——————-।।
ये अपनी जवानी के जलवें, क्या खूब दिखाते हैं सबको।
ये इनकी हैवानी के शोले, जो खाक बनाते हैं सबको।।
वो करते हैं जुल्म दरिद्र पर, कोई दर्द नहीं इनको कुछ भी।
वो देते हैं नसीहत जीने की, समाज के खातिर मरने की।।
बोलचाल मलमूत्र त्याग का——————।।
ये रूप बदलते जादूगर, पल पल में साथ बदलते हैं।
तारीफ ये अपनी बहुत, औरों की बुराई करते हैं।।
जज्बात समझते नहीं दिल के, नहीं होता आधार इनका कुछ भी।
वो करते हैं बातें सिध्दांतों की, कर्णधार समाज का होने की।।
बोलचाल मलमूत्र त्याग का——————-।।
जहाँ सजती है इनकी महफ़िल, दौरे-हुस्नो-शराब वहाँ चलते हैं।
खाक पवित्र रिश्तें होते हैं, वहाँ नाच पश्चिम के चलते हैं।।
और करते हैं सबकी नींद हराम, जिन्हें होश नशे में नहीं कुछ भी।
वो करते हैं ऐसी महफ़िलें, शान्ति समाज में लाने की।।
बोलचाल मलमूत्र त्याग का—————–।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)