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11 Sep 2025 · 1 min read

बात

बात बात में बात बढ़ी है
बातों की ना बात बड़ी
बात बताने और सुनाने
बात बात से बात बनी ।

कुछ कविता कुछ कहानी
सब बात की अपनी जुबानी
रस,छंद और अलंकार कई
कोई गुण,शक्ति की बात करें।

कभी हंसाती,कभी रुलाती
कभी गहरा सा चोट दे जाती
जिसकी बात समझ में आती
आगे–आगे वहीं बात है जाती।

बात करने को पांव पकड़ता
ना हो बात तो नाक रगड़ता
एक बार बस बात करें तो
बात सफल हो बात सफल।

बात–बात में चाल रहती हैं
चाल की भी बात रहती हैं
चाल चलू या बात रखूं
खुद से मिलने की बात कहूं।

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