विपदा में पंजाब
पंजाबी बेचारा घनी विपदा का मारा,
रक्षा करो सरकार हमारी -२ ।।
हमारे सुख में दिन काटते थे,
एक दूजे का दु:ख बटते थे।
थे सुखी सभी नर-नारी,
हमारे गूंजे थी किलकारी।
बाढ़ यहां आने से चौपट हो गया सारा ।।
पंजाब बिचारा…
खेतों में फसल लहराए
हम मेहनत करके खाएं
खाने का खेतो पर आना
फिर मिलकर उसको खाना
विपद यहां आने से परिवार बिखर गया मारा
पंजाब बेचारा…
सब कुछ पानी में बह गया
मैं यूंही देखता रह गया
अपनों का साथ छूट गया
क्यूं भाग्य विधाता रूठ गया
पत्नी बच्चो को देखूं जब छूटा हाथ हमारा
पंजाब बेचारा…
पंजाब अन्न की नगरी
क्यों किस्मत हमारी बिगड़ी
हम अन्न उगाने वाले टुकड़े-टुकड़े को तरसे
न जाने कितने मर गए यूं ही पानी में सड़के
ना आंसू रुके हमारे जब देखा आज नज़ारा
पंजाब बेचारा..