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11 Sep 2025 · 1 min read

उड़ने दो मन के पंछी को मुक्त गगन में।

उड़ने दो मन के पंछी को मुक्त गगन में।
बाधक बनना उचित नहीं है कभी लगन में।।

😊प्रणय प्रभात😊

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