रात के अंधियारे में,
रात के अंधियारे में,
वो चश्मे चिराग़ लगे,
दिन के उजियारे में,
वो हर दिल अज़ीज़,
रहबर ए आफताब लगे
मै जब भी सोचता हूं उनको
कभी दिल के हिज़्र में
कभी सोच की कुंठाओं में
वो रहबर मेरे महताब लगे
रात के अंधियारे में,
वो चश्मे चिराग़ लगे,
दिन के उजियारे में,
वो हर दिल अज़ीज़,
रहबर ए आफताब लगे
मै जब भी सोचता हूं उनको
कभी दिल के हिज़्र में
कभी सोच की कुंठाओं में
वो रहबर मेरे महताब लगे