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10 Sep 2025 · 1 min read

रात के अंधियारे में,

रात के अंधियारे में,
वो चश्मे चिराग़ लगे,
दिन के उजियारे में,
वो हर दिल अज़ीज़,
रहबर ए आफताब लगे
मै जब भी सोचता हूं उनको
कभी दिल के हिज़्र में
कभी सोच की कुंठाओं में
वो रहबर मेरे महताब लगे

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