....शब्दों के घाव ..
शब्दों के घाव बड़े गहरे
अन्दर तक छलनी करते हैं
पर देने वाला यहीं कहता है
हमने कहां खंजर घोपे हैं
रूबी चेतन शुक्ला
शब्दों के घाव बड़े गहरे
अन्दर तक छलनी करते हैं
पर देने वाला यहीं कहता है
हमने कहां खंजर घोपे हैं
रूबी चेतन शुक्ला