Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
10 Sep 2025 · 1 min read

मिथिला भाषा समायोजन।

मिथिला भाषा समायोजन।
-आचार्य रामानंद मंडल।
मैथिली आ मिथिला भाषा मे अंतर हय।जोतिश्वर आ विद्यापति मासूम न बल्कि चतुर रहतन।वो जनैत रहलन कि संस्कृत कृत्रिम हय वो जनभाषा न हय। जनभाषा मे साहित्य लिखब त वो लोकप्रिय आ कालजयी बनत।तैं तुलसीदास अवधि मे लिखलन आ लोकप्रिय सर्वग्राह्य बन गेलन। मिथिला भाषा अर्थात सम्पूर्ण मिथिला के भाषा शैली के समायोजन। मैथिली अर्थात पंचकोसी वा सोतिपुरा बोली।आब मैथिली के पाणणि के जका संस्कृत न बना देल जाय संस्कृत लेखा केवल मंत्र पाठ के भाषा बन जाय आ अपन वजूद के लेल शास्त्रीय भाषा के मांग कैल जाय। मैथिली के मिथिला के जन जन के भाषा बनायल जाय।न त मैथिलीये मे व्याकरणाचार्य न हय। अपितु बज्जिका आ अंगिका आदि मे सेहो व्याकरणाचार्य मौजूद हतन।
मैथिली के हिंदी के बोली कहल जाय छै।आइयो महाकवि विद्यापति हिंदी पोथी मे विराजमान हय। मैथिली नाम त कालब्रुक देले छतन। मिथिला के भाषा मैथिली हय वो त जोतिश्वर आ विद्यापति जीयो न जनैत रहलन। मैथिली नामाकरण के बादो चंदा झा मिथिला भाषा रामायण लिखलन।त आब मैथिली के व्यापक बनबैत मिथिला भाषा के काहे न समायोजन कैल जा सकय हय।
व्याकरण त बनायल जाइ छैय। मिथिला क्षेत्र के भाषा सर्वे क के सभ शैली के समावेश कैल जा सकैय हय।न त बज्जिका अंगिका खोरठा आदि बनल रहत।येन केन प्रकारेण हिंदी के बोली मैथिली अष्टम् सूची मे आयल।तहिना कोनो बाजपेई बज्जिका आदि के अष्टम अनुसूची मे सम्मिलित करत।सभ दिन मैथिल महासभा के कानून न चलत।
-आचार्य रामानंद मंडल सीतामढ़ी।

Loading...