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10 Sep 2025 · 1 min read

चुभन .....

चुभन …..

न जाने क्यों
सपनों में
एक नमी सी बनी रहती है
शायद
चुभती रहती हैं
किर्चियाँ
काँच से नाजुक
टूटे सपनों की

सुशील सरना /

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