चुभन .....
चुभन …..
न जाने क्यों
सपनों में
एक नमी सी बनी रहती है
शायद
चुभती रहती हैं
किर्चियाँ
काँच से नाजुक
टूटे सपनों की
सुशील सरना /
चुभन …..
न जाने क्यों
सपनों में
एक नमी सी बनी रहती है
शायद
चुभती रहती हैं
किर्चियाँ
काँच से नाजुक
टूटे सपनों की
सुशील सरना /