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10 Sep 2025 · 1 min read

बाहर से कुछ और हैं,

बाहर से कुछ और हैं,
अन्दर से कुछ और ।
सच्चाई को खा गया ,
बदले युग का दौर ।।
सुशील सरना / 10-9-25

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