विषधरों की वामियाँ पुजने लगीं हैं।
विषधरों की वामियाँ पुजने लगीं हैं।
अब सियासी खामियाँ पुजने लगीं हैं।
तीव्र निद्रा में हुए थे लीन उनकी,
आजकल नाक़ामियाँ पुजने लगीं हैं।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’
विषधरों की वामियाँ पुजने लगीं हैं।
अब सियासी खामियाँ पुजने लगीं हैं।
तीव्र निद्रा में हुए थे लीन उनकी,
आजकल नाक़ामियाँ पुजने लगीं हैं।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’