हैप्पी पितृ पक्ष
व्यंग्य
हैप्पी पितृ पक्ष
माई डियर पापा
कैसे हो। हम सब भी ठीक हैं। गुड़िया बड़ी हो गई है। अब खेलने लगी है। आपका पोता भी अच्छा है। स्कूल जाने लगा है। शिप्रा भी अच्छी है। मम्मी भी मस्त हैं। आपको याद करती रहती है। आप तो हैं इसलिए अब हमसे लड़ती रहती हैं। जब भी शॉपिंग को जाती हैं तो आपको याद करती हैं।
आपको तो पता है, शिप्रा घर का काम नहीं करती। मैं भी उससे डरता हूं। पिता के गुण बेटे में आना स्वाभाविक हैं। वो मर्द ही क्या जो बीबी से न डरे। बट। पापा, आपकी कमी बहुत खलती है। आप बिना हिसाब दिए चले गए। बैंक वाले कह रहे हैं अकाउंट होल्डर को लाओ। आपको मैं कहां से लाऊं? आपको अकाउंट ज्वाइंट कराना चाहिए था। पैसे तो निकल जाते।
मम्मी कुछ करने को तैयार नहीं है। हमने डेथ सर्टिफिकेट भी बनवा लिया। बैंक वालों को एफिड डेविड भी दे दिया। फिर भी कह रहें हैं..यमराज जी के दस्तखत कराओ। वही लेकर गए थे। आपसे तो रोज मुलाकात होती होगी। बैंक में आकर दस्तखत कर दें।
क्या क्या बताऊं। प्लॉट, दुकान सबमें कोई न कोई लफड़ा है। आप कुछ निबटाकर नहीं गए। बच्चे बड़े हो रहे हैं। इनका भी खर्चा है। हम खाली हैं।
यह शिकायत नहीं है। रिक्वेस्ट है। आप हर साल 15 दिन के लिए आते ही हो। मामले को निबटा दो। सपने में आने का कोई फायदा नहीं है। हम आजकल बहुत बिजी हैं। ऑफिस में बहुत लोड है। दम मारने की फुर्सत नहीं है। तर्पण कहां से करूं?
पंडित जी को पेटीएम कर दिया है। वह सब कर लेंगे। आप चिंता मत करो । शिप्रा और मम्मी महिला मीटिंग में गईं हैं। तभी यह पत्र लिख रहा हूं।
प्लीज पापा। हो सके तो काम निबटवा दो। आई लव यू पापा। टेक केयर। हैप्पी पितृ पक्ष।
आपका अपना
10.09.2025