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10 Sep 2025 · 1 min read

तू इस तरह गर चुपचाप रहेगा चांद

इस तरह गर तू चुपचाप रहेगा चांद
तो फिर तेरे किस्से कौन कहेगा चांद

धरती का कोई कोना महफूज नहीं
देखें कितने दिन महफूज रहेगा चांद

तन्हा रातों की पैमाइश को निकला
अब तारों के कितने तंज सहेगा चांद

नदियों में उसकी परछाई बहती है
रातों को क्या उसके संग बहेगा चांद

इंसानों ने फिर उसपर झंडे गाड़ दिए
टुकड़ों-टुकड़ों में फिर आज बटेगा चांद

राहु केतु तुझको डसने आए हैं
तेरा संकट जाने कौन हरेगा चांद

मेरी नींदें मुझसे रूठी रहती हैं
क्या रातों को मेरे संग जगेगा चांद

कफ़्फ़ारा करने की नौबत आ जाए
जाने ऐसा कौन गुनाह करेगा चांद

माह में एक दिन उसको छुट्टी मिलती है
कितने दिन आखिर अब्सेंट रहेगा चांद

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