तू इस तरह गर चुपचाप रहेगा चांद
इस तरह गर तू चुपचाप रहेगा चांद
तो फिर तेरे किस्से कौन कहेगा चांद
धरती का कोई कोना महफूज नहीं
देखें कितने दिन महफूज रहेगा चांद
तन्हा रातों की पैमाइश को निकला
अब तारों के कितने तंज सहेगा चांद
नदियों में उसकी परछाई बहती है
रातों को क्या उसके संग बहेगा चांद
इंसानों ने फिर उसपर झंडे गाड़ दिए
टुकड़ों-टुकड़ों में फिर आज बटेगा चांद
राहु केतु तुझको डसने आए हैं
तेरा संकट जाने कौन हरेगा चांद
मेरी नींदें मुझसे रूठी रहती हैं
क्या रातों को मेरे संग जगेगा चांद
कफ़्फ़ारा करने की नौबत आ जाए
जाने ऐसा कौन गुनाह करेगा चांद
माह में एक दिन उसको छुट्टी मिलती है
कितने दिन आखिर अब्सेंट रहेगा चांद