( छत्तीसगढ़ी हास्य व्यंग्य--बिजली बहिनी से लड़ाई )
( छत्तीसगढ़ी हास्य व्यंग्य–बिजली बहिनी से लड़ाई )
छत्तीसगढ म दस परसेन्ट बाढ गे हे रेट बिजली के,
मंझनिया सुते के बदला खेंलिंगे खेल भौंरा गिल्ली के।
अउ भांटो दुबेर के जगह चा्र घो ठंडा पानी् से नहाइंगे,
पानी के ताक़त से,हम बिजली पहलवान ला हराइंगे।
अउ उपाय हे फ़ेमिली ला धर महीना बर गांव चले जाय ,
उहां बिजली ठंड म जाथे तो बरसात के पहली नइ आय।
एयरकंडिसन होटल म वेटर बने म घलो नइ हे बुराई,
ग़रीब ऐसने लड़ सकथे हवा पानी बिजली के लड़ाई।
या गर्मी के दु महीना अपन घर म बरफ़ के व्यौपार करन,
बरफ़ के सहारा हम गर्मी के सुक्खा नदी ला पार करन।
सबले आखिर उपाय होही के घर के बिजली कटवा दन,
अउ मोम बत्ती, कंडिल के सहारे अंधियार के होले बारन।
तभे बिजली-पंखा-के उपर हमर डिपेन्डेन्सी कम हो पाही,
पुरखा मन बिजली बिन कैसे जीयत रहिस समझ म आही।
( डॉ संजय दानी )