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10 Sep 2025 · 1 min read

काम गुण्डई उनका था पर नाम मोहब्बत छपता था

ग़ज़ल

पढ़े-लिखे गुण्डों का यारो हर इक शय पर कब्ज़ा था
दशकों यूंही बीत गए पर लोगों को डर लगता था

काम गुण्डई उनका था पर नाम मोहब्बत छपता था
दानिशमंदों से उनका यूं प्यार-भरा-सा रिश्ता था

पढ़ा-लिखा भी बहुत था यारो, नाम-ईनाम भी लेता था
पता लगा इक दरबारी था, गाता और बजाता था

मार-धाड़ और बदमाशी में जिसे महारत हासिल थी
इश्तिहार में यारो मेरे उसका नाम अहिंसा था

-संजय ग्रोवर

( तस्वीर: संजय ग्रोवर )

दानिशमंद=बुद्धिमान, बुद्धिजीवी

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