झूले का सच
झूले का सच
“अरे गजब आज भी ये झूला खाली ही है।” स्वाति गार्डन में पड़े एक खाली झूले को देख कर अचंभित होकर कहा। बाकी जगह खूब चहल-पहल थी।
स्कूल के बगल का यह गार्डन उस सब के मस्ती का केन्द्र था। वह सोच रही थी वो भी क्या दिन थे, स्कूल से छूटते ही सबसे पहले गार्डन पहुंचने की होड़ होती थी और फिर सभी झूला छापने की रहती थी। सभी उससे झूला छीनने की कोशिश करती थी, लेकिन किसी इतनी ताकत नहीं थी कि झूला छीन ले।
एक दिन एक लड़की को गुस्सा आ गया और वह झूला को रोकने और धक्का देने लगी।
जिस कारण से झूला आडे़ तिरछे जाने लगा।
वह बैलेंस नहीं बना पायी और झूले से गिर गई।
बेहोश भी हो गई थी।
उसे बहुत बुरा लगा था। सभी पूछते कि क्या हुआ? कैसे गिर गई?
तभी पीछे से जानी पहचानी आवाज आयी “अरे स्वाति तुम यहाँ कैसे? इंडिया कब आयी? अब तो जाॅब भी लग गई होगी?”
“हाय! विनी कैसी हो? तुमसे ही मिलने आयी हूँ। सारे सवाल एक साथ कर लोगी क्या?”
“ओके, घर चल।”
“अच्छा विनी ये बता कि इस झूले पर अब कोई नहीं बैठता है क्या?”
“नहीं जब से तुम गिरी थी और तुम्हें भूत दिखा था। कोई नहीं बैठता है।”
स्वाति सिर पीटते हुए कहा “हे भगवान, लोग कभी भी अंधविश्वास से दूर नहीं हो पाएंगे।”
“मोहतरमा कुछ दिन विदेश में रहने क्या लगी। ये अंधविश्वास लगने लगा? भूत तो तुम्हें ही दिखा था ना?”
“अरे वो तो मैं उस लड़की से हार नहीं मानना चाहती थी। इसलिए उसपर इल्जाम लगाने के बजाय मनगढ़ंत कहानी बनाकर कह दिया था,
कि – झूले के ऊपर एक काला भूत बैठा था। उसी को देख कर मैं डर गई और मेरा हाथ छूट गया।”
“हेंऽऽ…?”
–पूनम झा ‘प्रथमा’
जयपुर, राजस्थान
Mob-wats – 9414875654
Email – poonamishra14869@gmail.com