तेरे मौन अधर को पढ़ती रही ये आँखें,
तेरे मौन अधर को पढ़ती रही ये आँखें,
हर स्पंदन में ढूँढ़ती रहीं तेरी पनाहें आँखें।
तेरी बाँहों का सपना सँजोए हर पल,
लिखती रहीं मिलन की अमर परछाइयाँ आँखें।
तेरे आने से जीवन हुआ मधुमय गान,
झलकाती रहीं प्रेम की रसभरी कथाएँ आँखें।
तेरे बिना अधूरा है मेरा हर उत्सव,
पलकों में छुपाए रहीं तेरी कामनाएँ आँखें।
कभी चाँद-सी चमकी, कभी बदली-सी भीगी,
तेरी चाह में डूबी रहीं निश्छल भावनाएँ आँखें।
तू ही दीप है मेरे अंतःपुर का सदा,
तेरी छवि सँजोती रहीं अमिट प्रण आँखें।