पल - पल बीते कल्प सा,
पल – पल बीते कल्प सा,
रुके न जब दृगधार ।
पोर – पोर में प्रेम को,
पीर करे साकार ।।
सुशील सरना / 9-9-25
पल – पल बीते कल्प सा,
रुके न जब दृगधार ।
पोर – पोर में प्रेम को,
पीर करे साकार ।।
सुशील सरना / 9-9-25