Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
9 Sep 2025 · 1 min read

पल - पल बीते कल्प सा,

पल – पल बीते कल्प सा,
रुके न जब दृगधार ।
पोर – पोर में प्रेम को,
पीर करे साकार ।।
सुशील सरना / 9-9-25

Loading...