हो रहा अपमान नित अब शुद्ध हिन्दी का।
हो रहा अपमान नित अब शुद्ध हिन्दी का।
रूप है विकराल शोषित क्रुद्ध हिन्दी का।
राष्ट्रभाषा का दिनों दिन गिर रहा स्तर,
छिड़ गया अस्तित्व पाने युद्ध हिन्दी का।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’
हो रहा अपमान नित अब शुद्ध हिन्दी का।
रूप है विकराल शोषित क्रुद्ध हिन्दी का।
राष्ट्रभाषा का दिनों दिन गिर रहा स्तर,
छिड़ गया अस्तित्व पाने युद्ध हिन्दी का।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’