Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
9 Sep 2025 · 1 min read

मनाईं की ना...!

. पूर्णिका ०००५

प्रारम्भी नेह:-
आपन दुःखवा दरदवा बताईं की ना।
रुसल किस्मत के बोल मनाईं की ना।।

जबरन सभवा मे लोगवा हँसेला काहें।
संगे उनकर हम मनवा हँसाईं की ना।।नेह:-१।।

खेले-कूदे में तेज पढ़े-लिखें में फेल।
अइसन लईका के आगे पढ़ाईं की ना।।नेह:-२।।

ई रोजगारीया में मनवा लागत नईखे।
गिन-गिन के ई चील्लर कमाईं की ना।।नेह:-३।।

अँखिया मूँद भरोषा ई सब पर करे।
कउनो चलबाज़ ऐके फ़साईं की ना।।नेह:-४।।

बतीये बतीये में अपमान करे ला ऊ।
अइसन थेथर मरदवा पिटाईं की ना।।नेह:-५।।

रिश्ता अपनन से रखब न मेल जोल के।
दुनियाँ आगे जा तोहके भुलाईं की ना।।नेह:-६।।

परिचयी नेह:-
रतिया रतिया भर लऊके सपनवा में जे।
ओके जिनगी में “चिद्रूप” बसाईं की ना।।
__________________________________
©️®️ पूर्णिका-कार :- पाण्डेय चिदानन्द “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित ०९/०९/२०२५)
__________________________________

Loading...