तोहार कब हो जाई...!
. पूर्णिका ०००३
प्रारम्भी नेह:-
जवन कहबु ए रानी तवन सब हो जाई।
बोल-बोल करेजा तोहार कब हो जाई।।
हम होखते बियाह करवा लेईम गवनवां।
होव राजी त घरवे शिमला रब हो जाई।।नेह:-१।।
हमरे खातिर मायका तूँ हूँ छोड देहलु।
देख ससुरे पीहर क मज़ा तब हो जाई।।नेह:-२।।
कल जाते ही ड्यूटी पे क्वाटर ले लेईम।
बोल पोस्टिंग जयपुरवे में अब हो जाई।।नेह:-३।।
संग रहिह तूंहुँ बड़की मेमसाहब बन के।
जईह गँउवा तू मन तोहार जब हो जाई।।नेह:-४।।
परिचयी नेह:-
हउवे सबसे बड़ा सास ससुरें क ही सेवा।
बोली ‘चिद्रूप’ त चुप तोहार लब हो जाई।।
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©️®️ पूर्णिका-कार :- पाण्डेय चिदानन्द “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित ०९/०९/२०२५)
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