"दौर" | Daur | By ~हनीफ़ शिकोहाबादी | @haneefshikohabadi
◇◇◇“““ दौर ”””◇◇◇
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हर दौर की अपनी चाल है
कभी तेज़
कभी ठहराव लिए
कभी रिश्तों को तौलता दौर
कभी ख़्वाबों का
हिसाब लिए
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दौर बदलता रहता है
ना वक़्त
किसी का ठहरता है
जो आज
ग़ुरूर में चलता है
वो कल
धूल में मिलता है
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इस दौर का
बस इतना सबक़
हालात पे ना इतराना
इक रब की
मर्ज़ी चलती है
उस के आगे
सब झुक जाना
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हर दौर में परख होती है
कभी हिम्मत
कभी जज़्बे की
कभी तलवार की नोक की
कभी कलम के सब्र की
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दौर रंजिश भी बुनता है
मोहब्बत भी सिखाता है
जो दिल साफ़ रखता है
उसे ऊँचा भी उठाता है
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कभी दौर
वादों का होता है
कभी धोके का
बाज़ार सजाता है
कभी इंसाफ़ की
राह बनती है
कभी परचम
ज़ुल्म का लहराता है
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चाहे कितना
वक़्त बदल जाए
अँधेरों की हद
कहाँ रहती है
हर रात के बाद
सवेरा आता है
हर आँसू के बाद
हँसी बहती है
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उम्मीद का
चराग़ बुझता नहीं
वो राख तले भी
चमकता है
इंसान अगर
सच्चा रह ले तो
उस पे नाज़
वक़्त भी करता है
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आख़िर दौर
गवाही देता है कि
इंसान क्या छोड़ गया
सच की राह पर
क़दम रखे या
झूठ के सहारे बढ़ गया
~#हनीफ़_शिकोहाबादी | #Haneefshikohabadi