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9 Sep 2025 · 1 min read

मेघ सघन

मुक्तक
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सभी दिशाओं में जब, मेघ सघन छाए।
उमड़ घुमड़ कर रिमझिम, पानी बरसाए।
तृप्त हुए सब प्राणी, तृप्त हुई धरती।
वन उपवन की शोभा, बढ़ती ही जाए।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य

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