मेघ सघन
मुक्तक
~~~~~~~~~~~~
सभी दिशाओं में जब, मेघ सघन छाए।
उमड़ घुमड़ कर रिमझिम, पानी बरसाए।
तृप्त हुए सब प्राणी, तृप्त हुई धरती।
वन उपवन की शोभा, बढ़ती ही जाए।
~~~~~~~~~~~~~~~~
-सुरेन्द्रपाल वैद्य
मुक्तक
~~~~~~~~~~~~
सभी दिशाओं में जब, मेघ सघन छाए।
उमड़ घुमड़ कर रिमझिम, पानी बरसाए।
तृप्त हुए सब प्राणी, तृप्त हुई धरती।
वन उपवन की शोभा, बढ़ती ही जाए।
~~~~~~~~~~~~~~~~
-सुरेन्द्रपाल वैद्य