"
”
क्या गज़ब दोस्ती निभाता है,
सब्र को अब भी आज़माता है।
मैं जिसे आंच दिया करता था,
वो मुझे बर्फ़ में लगाता है।।”
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क्या गज़ब दोस्ती निभाता है,
सब्र को अब भी आज़माता है।
मैं जिसे आंच दिया करता था,
वो मुझे बर्फ़ में लगाता है।।”