*सौ-सौ घोटाले करके भी, नेताजी मुस्काते हैं (हास्य व्यंग्य हि
सौ-सौ घोटाले करके भी, नेताजी मुस्काते हैं (हास्य व्यंग्य हिंदी गजल)
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1)
सौ-सौ घोटाले करके भी, नेताजी मुस्काते हैं
जिस पर जितने लगे मुकदमे, उतने बड़े कहाते हैं
2)
धैर्य सीखना है तो सीखो, नेता खद्दरधारी से
छींटा लगा खून का कुर्ता, धोकर प्रेस कराते हैं
3)
घर में एक विधायक बनकर, कर सबका उद्धार गया
सात पीढ़ियों तक सब वंशज, धन-वाले हो जाते हैं
4)
पढ़ा-लिखा जो भाई था वह, प्रोफेसर ही बन पाया
जो अनपढ़ नेता है उसको, शिक्षक शीश झुकाते हैं
5)
तिकड़म से चुनाव जीतेंगे, फर्जी वोटों के बल पर
घुसपैठी को बहुत प्यार से, नेता गले लगाते हैं
रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451