*मर्यादा में रहकर भी*
मर्यादा में रहकर भी
सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है
आवश्यक नहीं इसके लिए
अपने संस्कार त्यागने पड़ें।
मर्यादा में रहकर भी
सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है
आवश्यक नहीं इसके लिए
अपने संस्कार त्यागने पड़ें।