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8 Sep 2025 · 1 min read

*मर्यादा में रहकर भी*

मर्यादा में रहकर भी
सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है
आवश्यक नहीं इसके लिए
अपने संस्कार त्यागने पड़ें।

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